यु तोह अपने भारत में संतो के रेले है

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॥ पावन पाठ ॥

यु तोह अपने भारत में संतो के रेले है,

शिरडी वाले साई तो लाखो में अकेले है,

उनपे न हसो लोगो मन की आंख से देखो,

अपने भक्तो के लिए कितने दर्द झेले है,

शिरडी वाले साई तो लाखो में अकेले है,

आ गये है वो आखिर साई के चरणों में,

जो थे फसे हर दम माया के झमेले में,

शिरडी वाले साई तो लाखो में अकेले है,

जा रहे है शिरडी में लोग साई दर्शन को.

अब तो भुला लो वहाँ हम यहाँ अकेले है,

शिरडी वाले साई तो लाखो में अकेले है,

साई कीजिये किरपा लोग हो गये दुश्मन,

जाऊ मै कहा आखिर दुश्मनो के रेले है,

यु तोह अपने भारत में संतो के रेले है,

शिरडी वाले साई तो लाखो में अकेले है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।