सदा गुफा वाले जोगी नाल प्यार

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॥ पावन पाठ ॥

सदा गुफा वाले जोगी नाल प्यार होर साहनु की चाहिदा,

एहना दिता ओहने दिता न संभाल,

सदा गुफा वाले जोगी नाल प्यार होर साहनु की चाहिदा,

रोट परशाद असि योगी ले बनाई दा,

जदो भी भुलाये ओह दो गुफा उते जाइदा,

ओह्दी किरपा नाल गया बाहरले मुल्क साडा लाल,

होर साहनु की चाहिदा.....

धुप देखाउने आ ते ज्योत जगाउने आ,

बाबा जी दी आरती नित आसी गाउने आ,

सेवा करदा है सारा परिवार,

होर साहनु की चाहिदा.....

सब कुछ दिता ओहने जो भी असि मंगया,

ओहदे रंगा दे विच तन मन रंगया,

बाहा फड के जोगी ने दिता तार,

होर साहनु की चाहिदा.....

घर विच बाबा जी दा मंदिर बनाया है,

धुना भी लगाया इ ते आसन सजाया है,

सोनी पटी वाला करदा दीदार,

होर साहनु की चाहिदा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।