चिमटे दा नजारा मेरे जोगियां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन बाबा बालक नाथ भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चिमटे दा नजारा मेरे जोगियां चिमटे दे नजारा,

चिमटा बड़ा न्यारा मेरे जोगियां,

मेरे बाबा जी ने जदो चिमटा घुमाया सी,

उजड़ियाँ फसला न फिर लहराया सी,

ताहियो लगदा बड़ा प्यारा,

चिमटे दा नजारा मेरे जोगियां चिमटे दे नजारा,

गोरख दा मान तोड़ सब न दिखाया सी,

कोली रक्श न ओहने सिहदे राहे पाया सी,

ताहियो सब दा बने सहारा,

चिमटे दा नजारा मेरे जोगियां चिमटे दे नजारा,

माता रत्नो ने जदो बोलियां लगाइयाँ सी,

बारा साला दियाँ लस्सियाँ रोटियां दिखाइयाँ सी,

ताहियो पुजदा है जग एहनु सारा,

चिमटे दा नजारा मेरे जोगियां चिमटे दे नजारा,

भूत ते प्रेत तेरे चिमटे तो डर दे,

दुःख ते कलेश फिर कोल नहियो खड़ दे,

करो लकशये दा पार उतारा मेरे जोगियां,

चिमटे दा नजारा मेरे जोगियां चिमटे दे नजारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।