तुर पेया बालक जंगल दे विच

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव चरना विच विरति लाइ धर्मो माँ ने विधि वधाई,

जिथे पारवती माँ आउंदी आख्या ओथे जान ले,

तुर पेया बालक जंगल दे विच शिव दा दर्शन पाउन लई,

सुन सान जंगल दे विच छाया पे अन्धकार बड़ा,

सिद्ध जोगी न शिव भोले दे चरना दा सी प्यार बड़ा,

पाउन लाई शिव भोले ताहि फिरदा जान गवान लई,

तुर पेया बालक जंगल दे विच शिव दा दर्शन पाउन लई,

पारवती माँ घाट ते आई करन लाई आशनां लाई जदो ,

रो रो बालक अर्ज गुजारे दउ दर्शन भगवान् कदो,

नाल जोगी नु लेके तुर पई ओहदा मन तरुण लई,

तुर पेया बालक जंगल दे विच शिव दा दर्शन पाउन लई,

भगति देख के बालक दी माँ गोरा होइ दयाल बड़ी,

नाल के छोटे बालक ताहि जाके कॉल भगवान खड़ी,

चरना दे विच डीग पेया बालक भोले ताहि मनाऊँ लई,

तुर पेया बालक जंगल दे विच शिव दा दर्शन पाउन लई,

जिस धर्मो ने दस्य राह तनु ओहदा कर्ज चुकाना पाउ,

पाली बन के माँ रत्नो दा तनु वक चढ़ौना पाउ,

कुलविंदर मञ्जुली तू भी आजा गुफा ते ज्योत जगाऊँ ली,

तुर पेया बालक जंगल दे विच शिव दा दर्शन पाउन लई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।