अज पैरा विच घुंगरू पाके मैं दर तेरे नचना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अज पैरा विच घुंगरू पाके मैं दर तेरे नचना,

संगा सरिया मैं ला के तनु सीने च वसा के हर साह दे नाल नाम तेरा जपना,

अज पैरा विच घुंगरू पाके मैं दर तेरे नचना,

भगत ध्यानु वंगु दर तेरे नचना,

टूट जान घुंघरू मैं नचनो नहीं हटना,

माथे उते टिका ला के लाल चुनी गल पा के तेरे नाम वाले रंग विच रंगा,

अज पैरा विच घुंगरू पाके मैं दर तेरे नचना,

नच नच भावे तेरे पै जान छाले,

दर तेरे नच्दे ने कहन्दे भागा वाले,

मोह जग दा भुला के प्यार तेरे नाल पाके,

जावा तेरे चरना च मैं भी वसना,

अज पैरा विच घुंगरू पाके मैं दर तेरे नचना,

नचना मैं आज नाले सब न नचाना है,

लोपके दे बिट्टू वंगु गुण तेरा गाना है,

चढ़ी रवे तेरी लोर ना मैं करा कुझ होर,

वास बॉबी तेरे दिल विच रखना,

अज पैरा विच घुंगरू पाके मैं दर तेरे नचना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।