पिलादे मुझे साई नाम की मस्ती

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॥ पावन पाठ ॥

पिलादे मुझे साई नाम की मस्ती,

ऐसी मैं पीला दे साकी चढ़ा दे सबको मस्ती,

पिलादे मुझे साई नाम की मस्ती,

चढादे मुझे साई नाम की मस्ती,

तेरे नाम की पीने वाले दुनिया से नहीं डरते,

सिर जाए तो जाए बेशक शिकवा कभी न करते,

तेरे हवाले कर दी साई हम ने अपनी कश्ती,

पिलादे मुझे साई नाम की मस्ती,

रंग की मुझको शर्त नहीं है कोई भी रंग पिला दे,

रोज रोज अगर नहीं पिलाना इक ही बार पिला दे,

पीने वाला धाम न पूछे महंगी हो जा सस्ती,

पिलादे मुझे साई नाम की मस्ती,

मैं तेरे दरबार में आया लेकर दिल में आशा,

ऐसी नजर करो साई जी जाऊ न मैं प्यासा,

वसा रहे तेरा मेहखना उजड़ जाये चाहे बस्ती,

पिलादे मुझे साई नाम की मस्ती,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।