रंग बरसे माँ दे दवार रंग बरसे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रंग बरसे माँ दे दवार रंग बरसे,

माँ दे रंग विच ध्यानु रंगया मन चाहा फल माँ तो मंगया,

ऐसे रंग न माँ तेरा लाल तरसे,

रंग बरसे माँ दे दवार रंग बरसे,

माई दास तेरे रंग विच रंगया होर कोई न रंग उसनु जच्या,

दीदार तेरे न ओहदे नैन तरसे,

रंग बरसे माँ दे दवार रंग बरसे,

माँ दे रंग विच रंग जो सारे,

लोको कहंदा है बिट्टू आवाजा मारे,

खुला माँ दा दर होंगे कई आरसे,

रंग बरसे माँ दे दवार रंग बरसे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।