मुँह फेर जिदर देखु मुझे तू ही नज़र आये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मुँह फेर जिदर देखु मुझे तुही नजर आये,

माँ छोड़ के दर तेरा,

कही और किदर जाये माँ,

गेरोने तो ठुकराया अपने भी बदल गए है,

हम साथह चले जिनके वो दूर निकल गए है,

तेरी रहेम पर हु माँ ,

तू क्ष या ठुकराये,

माना के में पापी हु मुझे खबर गुनाहो की ,

बस इतनी सजा देना मुझे मेरी खताओ की,

तेरे दर पे हो सर मेरा माँ,

और सास निकल जाये माँ,

हम खाक नशीनो की क्या खूब तमन्ना है,

तेरे नाम से जीना है तेरे नाम से मरना है,

मरना तो है जो तेरी ,

चोखट पे जो मर जाये,

सूरज और चन्दा का आखो में उजाला है,

मस्तक पर अघनी भी प्रचंड ज्वाला है,

तेरी नजरे कर्म होतो,

तेरा दास भी तर जाये,

Lalit ajbani

Panchwati

09890355940

09320355940

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।