झंडे दी फेरी ओनी आ

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॥ पावन पाठ ॥

झंडा धुंआ वाना लेके असि घर घर फेरी ओनी आ ,

घर श्रदा नाल सजाओ झंडे दी फेरी ओनी आ,,

झंडे दे विच योगी दा वासा करे पूरी उम्मीद ते आसा,

पुत्रा दी एहने दात बकश के झड़ भगता दे दर लाउनि आ,

घर श्रदा नाल सजाओ झंडे दी फेरी ओनी आ,,

इस बेरी विच हल हों गे आज नहीं ता कल हों गे,

खुशिया दे हर पल होंगे,

सिद्ध जोगी ने मोहर लागौनि ा,

घर श्रदा नाल सजाओ झंडे दी फेरी ओनी आ,,

जिथे जोगी ने ला लाये डेरे धुमा पे गैया चार चुबेरे,

कष्ट न आवे उस घर नेड़े जिथे संगत बाबे दी ओनी आ,

घर श्रदा नाल सजाओ झंडे दी फेरी ओनी आ,

अमृत संग परिवार आऊं गे जोगी दा दीदार पौन गे,

भेटा गा के विक्की ने आज दर बाबे दे रौनक लाउनि आ,

घर श्रदा नाल सजाओ झंडे दी फेरी ओनी आ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।