हसरत मेरी मिटा दे अगर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हसरत मेरी मिटा दे अगर,

दर्शन मुझे दिखा दे अगर,

अपनी दया के सागर दे दो बुँदे तू पीला दे अगर,

हसरत मेरी मिटा दे अगर

आजा माँ तेरी राह में कब से बिछाये नैन,

देदे झलक दीदार की आये न दिल को चैन,

जीवन मेरा सवर जाये चरणों से तू लगा ले अगर,

हसरत मेरी मिटा दे अगर....

आया हु तेरे द्वार पे सुन ले मेरी पुकार,

होठो पे नाम है तेरा दिल में है तेरा प्यार,

किस्मत मेरी पलट जाये बिगड़ी को तू बना दे अगर,

हसरत मेरी मिटा दे अगर........

वर्धनी नाम है तेरा हो मुझपे तू दयाल,

बंसी की विनती सुन जरा हिर्दये तेरा विशाल,

मन के अँधेरे मिट जाये दीपक माँ तू जगा दे अगर,

हसरत मेरी मिटा दे अगर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।