पापा जल्दी आजा ना

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॥ पावन पाठ ॥

पिता रोटी है पिता कपड़ा है पिता मकान है,

पिता ननेसे परिन्दे का बड़ा आसमान है,

पिता है तो हर घर मे हर पल राग है,

पिता से माँ चूड़ी है बिन्दी है सुहाग है,

पिता है तो बच्चों के सारे सपने है,

पिता है तो बाज़ार में सारे खिलोने अपने है,

सुबह सवेरे घर से निकल जाते है,

मेरे पापा दाना पानी लाते है,

खून पसीना एक करके कमाते है,

कभ जागते कभ सोते है पता नही,

किस वक्त कहा होते है पता नही ,

एक अकेले घर का बोज उठाते है ,

मेरे पापा दाना पानी लाते है ,

सात समुन्दर पार से गुडयू की बाज़ार से,

अछि सी गुड़िया लाना गुड़िया चाहे ना लाना,

पापा जल्दी आजाना ,

खुद बीमार हो अपनी चिंता नही करते ,

हम को छिक भी आये पापा बहुत डरते,

खुद दवाई लेने बागे जाते है,

मेरे पापा दाना पानी लाते है ,

सात समुन्दर पार से गुडयू की बाज़ार से,

अछि सी गुड़िया लाना गुड़िया चाहे ना लाना,

पापा जल्दी आजाना ,

सब के पापा सुखी रहे खुशहाल रहे ,

चंचल बनके बच्चों की वो डाल रहे ,

हर संकट से पापा हमें बचाते है ,

मेरे पापा दाना पानी लाते है ,

सात समुन्दर पार से गुडयू की बाज़ार से

अछि सी गुड़िया लाना गुड़िया चाहे ना लाना

पापा जल्दी आजाना ,

Singar. Lalit Ambani

ajbani.lalit@gmail.कॉम

9890355940

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।