पड़ा हूँ चौखट पे तेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पड़ा हूँ चौखट पे तेरी दे दे सहारा माँ,

मझधार में है कश्ती दे दे किनारा माँ,

बता दे मुझे माँ इतना नजर क्यों है तूने फेरी,

ममता के इस आंचल में नहीं है जगह क्यों मेरी,

बचपन का प्यार फिर से देदे दोबारा माँ,

मझधार में है कश्ती दे दे किनारा माँ,

ख़ुशी के दो फूल मांगू मैं भी तेरी भगियां से,

वो भी न दो तो कह दे चल जाऊ दुनिया से,

खो जाऊ ऐसे जैसे टुटा हुआ तारा माँ,

मझधार में है कश्ती दे दे किनारा माँ,

छुपाऊ क्या तुझसे मैया हाल मेरा जाने तू,

लालू बलजीत को भी देख पहचाने तू,

भोज सी ये ज़िन्दी अब नहीं है द्वारा माँ,

मझधार में है कश्ती दे दे किनारा माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।