भगता तू क्यों ढोलदा है

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॥ पावन पाठ ॥

भगता तू क्यों ढोलदा है पौणाहारी ता तेरे नाल है,

भगता तू क्यों ढोलदा है सिंगियाँ वाला ता तेरे नाल है,

जेहरे बाबा जी नु ध्याउंदे ओ नहीं कदे गब्राउन्डे,

सिद्ध योगी पौणाहारी लाज सब दी बचाउंदे,

जाप कर दूधाधारी दा लेनगे तनु सम्भाळ वे,

भगता तू क्यों ढोलदा है पौणाहारी ता तेरे नाल है,

दर दर ते न जामी ज्योत बाबे दी जगावी,

सिंगी गल विच पावी रोट गुफा ते चडावी,

भभूति मथे नाल ला लवी,

भेहड़े हो जाने तेरे पार वे,

भगता तू क्यों ढोलदा है पौणाहारी ता तेरे नाल है

दुःख सब दे मिटावे योगी विशडे मिलावे,

जो भी दर ओहदे जावे मुहो मंगे फल पावे,

निगाह जिथे हो गी बाबे दी सब दें ही जन्म देवे सुधार वे,

भगता तू क्यों ढोलदा है पौणाहारी ता तेरे नाल है

लाल रत्नो दा प्यारा देवे सब नु सहारा,

सोहना सूंदर द्वारा पूजा करे जग सारा,

सोनी कहे पटी पिंड दा श्रदा नाल बाबे नु पुकार वे,

भगता तू क्यों ढोलदा है पौणाहारी ता तेरे नाल है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।