हूँ न तोड़ी जोगी वे मेरी प्रेम वाली डोर

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हूँ न तोड़ी जोगी वे मेरी प्रेम वाली डोर,

प्रेम वाली डोर जोगी प्रेम वाली डोर,

हूँ न तोड़ी जोगी वे मेरी प्रेम वाली डोर,

प्रेम तेरे विच पागल होक तेरियां करा उडीका,

देखि किधरे तुर न जावी पाके गुड़ प्रीता,

पावा ऊंची ऊंची शोर मेरा चलदा नहीं जोर,

हूँ न तोड़ी जोगी वे मेरी प्रेम वाली डोर,

टूट दे टूट दे टूट जांदी है ओ गल फिर न रेहँदी,

तेरे चरना विच बह के तनु एह गल केहन्दी,

किथे बनाना कठोर तेरे बिन न कोई होर,

हूँ न तोड़ी जोगी वे मेरी प्रेम वाली डोर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।