साई बाबा की पालकी

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॥ पावन पाठ ॥

साई बाबा की पालकी आई नाचो रे गाओ झूम के,

खुशियों मनाओ मधुर गीत गाओ शिरडी में आओ रे झुमके

आओ रे आओ कन्धा लगाओ फुले से इसको सजाओ,

महक उठे सब चारो दिशाये बाबा जी जय जय भुलाओ,

ढोलक भजाओ मंजीरे भजाओ साई नाथ के चरणों को चुम के,

खुशियों मनाओ मधुर गीत गाओ शिरडी में आओ रे झुमके

लाखो दीवाने आते है दर पे उन सब को साई ने तारा,

पल में सुनता वो देरी न करता देता है सब को सहारा,

श्रद्धा सबुरी को मन में जगाओ साई पालकी आई है झूम के,

खुशियों मनाओ मधुर गीत गाओ शिरडी में आओ रे झुमके

शिरडी की गलियों से निकली है देखो जन्नत सा इसका नजारा,

पालकी में आके जो कन्धा लगाये होता है इस का प्यारा,

डमरू भजाओ ताशा भजाओ साई पालकी चली है झूम के,

खुशियों मनाओ मधुर गीत गाओ शिरडी में आओ रे झुमके

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।