मेरा मन लग ओ गया

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॥ पावन पाठ ॥

सिद्ध जोगी दे पै गई रात मेरा मन लग ओ गया,

शाहतलाइयाँ पै गई रात मेरा मन लग ओ गया,

लग ओ गया बाबा लग ओ गया,

सिद्ध जोगी दे पै गई रात मेरा मन लग ओ गया,

मोर दी सवारी कर नाथ सोहने लगदे,

गुफा दे नजारे मेले रोनका भी लगदे असि किता है दीदार सारी रात,

मेरा मन लग ओ गया

सिद्ध जोगी दे पै गई रात मेरा मन लग ओ गया......

सोहनी जाहि सिर उते जचन जटावा जी चित करे जोगी दा दीदार नित पावा जी,

नाले बन जावा मैं चाँद दी चकोर,

मेरा मन लग ओ गया

सिद्ध जोगी दे पै गई रात मेरा मन लग ओ गया,

हाथ विच चिमटा ते पैरी पहुये पाये ने,

सिद्ध जोगी देखो कैसे रूप बनाये ने,

नाले रेहमता दी हो रही बरसात,

मेरा मन लग ओ गया

सिद्ध जोगी दे पै गई रात मेरा मन लग ओ गया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।