दर तेरे आउंगी मैं दूधधारियाँ

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॥ पावन पाठ ॥

दर तेरे आउंगी मैं दूधधारियाँ तू दुःख कट दे मालका मेरा,

शरदा नाल तक ले सहारा उस दा ये तू डूभदी वेहड़ी न बने लौना,

पौणाहारी सबना दे दुःख कट दा कई तर गये कइया ने तर जाना,

श्रदा ने आउना तेरे दर ते नाल रज रज पाउ दीदार मैं,

सच्ची एमी ही निमाणी रही रुलदी हुंडी रही खजल ख्वार मैं,

हूँ तेरे दर तो मुरादा पौनियां बाबा दुखते मैं सेह लिया बथेरा,

दर तेरे आउंगी मैं दूधधारियाँ तू दुःख कट दे मालका मेरा,

जड़ो मर्जी जाके भरा ली झोलियाँ ओहदे दर दस काहड़ी थोड़ नी,

तू श्रदा दे नाल मथा टेक के बंद बाबे बालक दा रोट नी,

सबना दे ओह ता कारज सवार दा शीश दर ते झुकानदा राजा राणा,

पौणाहारी सबना दे दुःख कट दा लखा तर गये लखा ने तर जाना,

सच्ची नाम दे जहां उते चढ़ के लंग जाना भव सागर तो पार मैं,

कर दे मेहर दूधाधारियाँ गल पला पाके कर दी पुकार मैं,

गमा दे हनेरे कर दूर मालका कोई सूखा वाला करदे सवेरा,

दर तेरे आउंगी मैं पौनहारियाँ तू दुःख कट दे मालका मेरा,

जिहने भी झुकाया सिर दर ते मन विच रख विश्वाश नी,

ओहदे दर तो जिहने भी कुझ मंगाया बाबा करदा जरूर पूरी आस नहीं,

ताहि गुण गाउँदा फिर पौणाहारी दे सच्ची तर गया पूरी भी निमाणा,

पौणाहारी सबना दे दुःख कट दा लखा तर गये लखा ने तर जाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।