जोगी मेरा जोगी मेरा चंद वरगा

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॥ पावन पाठ ॥

जोगी मेरा जोगी मेरा चाँद वरगा,

मेरी प्रीत न चकोरा वाली,

चंद न भी चंद न भी दाग पे गया नी मेरे जोगी च दाग न कोई,

साढ़े नालो साढ़े नालो पत्थर चंगे ने जेहरे जोगी दिया चरना च रेह्न्दे,

साहनु भी तू पत्थर बना ले जोगियां वे असि तेरे चरना विच रहना,

साढ़े नालो भागा वाली धूल चंगी जेहड़ी योगी दे चरना च रेहँदी,

आसा न भी धूल तू बना ले योगियां असि तेरे चरना विच रहना,

सिम्ब्ला सिम्ब्ला तू मान न करि वे फल निविया रुखा न लगदे,

बंदया तू बंदया मान छड़ दे जे तू योगी दे चरना च रहना,

खाली हथ खाली हथ आया बंदया वे अथो खाली ही तू तुर जाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।