मैं नी डोलदा मैं नी डोलदा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मैं नी डोलदा मैं नी डोलदा,

मेरा बाबा जी दे भगता विच नाम बोल्दा,

मेरा योगी दे भगता विच नाम बोल्दा,

मोर बोलदे चकोर बोलदे,

इक वार तू जय कारा भगता होर बोलदे,

मेरे बाबे दा जय कारा भगता होर बोलदे,

इधर क्यारी उधर कयारी गबे कयररि योगी दी,

उठ माँ रत्नो रोटी ले जा योगी दी,

चाहे रख योगियां चाहे मार योगियां,

असि चढ़ना नहीं तेरा दरबार योगियां,

चाहे हु करे के चाहे हां करके,

साहनु तारियो बाबा जी सदी बांह फड़ के,

झंडे लाल भगतो लो शृंगार भगतो,

संग चल्या है बाबा जी दे दरबर भगतो,

असि योगी नाल मनाउना नवै साल भगतो,

सोनी चले आ संगता दे नाल भगतो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।