दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा

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॥ पावन पाठ ॥

दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा मैं दुनिया तो नहीं मंग दा,

लाया बाबा जी ने दिल विच डेरा ओ नित नेड़े होक लंग दा,

मैं नी डोलदा मैं नी डोलदा..............

पल्ला विच बदले ओ माथे दी लकीरा न योगी आप लिखे भगता दी तकदीर नु,

केहड़े रंग विच खड़े योगी मेरा,

दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा.....

बेहना नु वीर देवे मावा नु लाल जी,

अपने भगता दा रखड़ा ख्याल जी,

नाले पौंदा घर भगता दे फेरा,

दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा....

सच्चे दिलो जीना ओहदा नाम उचारिया,

बाबा जी ने ओहनू बाहो फड़ कहै तारिया ,

पंजा चोरा वाला टूट जांदा गेरा,

कोई नहीं नेड़े खंग दा,

दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा

किता है ब्यान मैं ता अपने ईमान दा,

उने वाले बलि नु ता सारा जग जान दा,

किदा होना है गेड चौरासी दा नवेड़ा पता मैनु सारे ढंग दा,

दिता बाबा जी ने आसरा बथेरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।