माँ काली तूने कैसी कृपा कर डाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ काली तूने कैसी कृपा कर डाली,

नाम तेरा जप्ते जप्ते,

मैं तो हुई मतवाली,

माँ काली तूने कैसी कृपा कर डाली

काली नहीं तू गौरी है, तूने अपना ये हाल किया,

संतानो के मन के काले रंग को खुद पर डाल दिया,

माँ काली तेरी ममता बड़ी है निराली,

नाम तेरे जपते जपते मैं तो हुई मतवाली,

माँ काली तूने कैसी कृपा कर डाली....

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मैं तेरे चर्नो से मैया आज लिपट जाऊंगी,

बनके तेरी शरणागत माँ ओर कहाँ जाऊगी,

माँ काली तेरी छाया में है खुशहाली,

नाम तेरे जपते जपते मैं तो हुई मतवाली,

माँ काली तूने कैसी कृपा कर डाली....

तू जो मुझको ना देखेगी दोष तुझे ही लगेगा

मेरा क्या बिगड़ेगा मैया जाग तुझ पे ही हसेगा,

माँ काली मैं फूल हूँ तू है माली,

माँ काली नाम तेरा जप्ते जप्ते,

मैं तो हुई मतवाली…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।