साई बाबा मुझे दर पे भुला ले

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॥ पावन पाठ ॥

साई बाबा मुझे दर पे भुला ले,

मैं दुनिया से तंग आ गया,

मुझे दुनिया से साई क्या लेना मुझे तो तेरा घर भा गया,

साई बाबा मुझे दर पे भुला ले,

दर्द जुदाई सेह नहीं पाउ,

बिन तेरे अब रह नहीं पाउ,

दर्द जुदाई वाला सेह नहीं पाउ,

तेरे बिन साई अब रह न पाउ,

बस इक तमना है दीदार तेरा पाउ,

वारि में मेरी रहना गुण गान तेरा गाउ,

सारी दुनिया में साई बाबा तेरा ही तो रंग छा गया,

साई बाबा मुझे दर पे भुला ले.........

तू चाहे तो राज करा दे साई तख्तो ताज दिला दे,

कोई और नहीं साई इक तेरे सिवा अपना,

ये सोच मिटा देना देखो जो अगर सपना,

हर रंग में है रंग साई तेरा,

मुझे तो तेरा रंग भा गया,

साई बाबा मुझे दर पे भुला ले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।