बदले गी किस्मत की लेख चुनड़ी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

इक वार ओड़ा कर तो देख चुनड़ी,

बदले गी किस्मत की लेख चुनड़ी,

हलकी बारी की तू चिंता मिटा दे ,

जैसी समाई हो वैसे उड़ा दे,

मैया को करदे तू भेट चुनड़ी,

बदले गी किस्मत की लेख चुनड़ी,

देखा है उनको भी चुनड़ी ओढ़ाते,

इक वार खा कर जो जीवन बीताते,

उनको बना गई है सेठ चुनड़ी,

बदले गी किस्मत की लेख चुनड़ी,

सोने चांदी के भले हो आभूषण,

हीरे जड़ित हार हो चाहे कंगन,

भारी सभी पर ये इक चुनड़ी,

बदले गी किस्मत की लेख चुनड़ी,

चुनड़ी ओढ़ाने वालो की भवानी,

अपने सिर ले लेगी सारी परेशानी,

सोनू ये देती सन्देश चुनड़ी,

बदले गी किस्मत की लेख चुनड़ी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।