शौकीन भस्मों का

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शौकीन भस्मों का बैठा है श्मशान में,

जो है देवो का देव जो कहलाये महादेव ,

सारी दुनिया जहां में,

शौकीन भस्मों का...

मुर्दो की राख भोले तन पे लगाते है,

उज्जैन वाले महाकाल कहलाते है,

भूत प्रेतों के साथ रहते है भोले नाथ,

हर दम रहते ध्यान में,

शौकीन भस्मों का...

अर्द्न्याक भोले आधी अन्त है,

असुर भी पूजे जिनको पूजे साधु संत है,

है भोले वर्धनी ये देते मन मानी,

ये लिखा वेद कुराण में,

शौकीन भस्मों का...

चलता है सिका इनका सारे ही ज़माने में,

बसमो से खेले होली मिलता मसाने में,

नाग लपटे तन पर मस्त है डमरू धर,

लटके है विशु कान में,

शौकीन भस्मों का

एह दानी बड़े है भोले रावण को देदी लंका,

तीनो लोको में बाजे मेरे भोले का डंका,

गिरी बोले हरदम बोलता हर हर बम,

गाये जा शिव की शान में,

शौकीन भस्मों का

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।