आज के युग में मानवता इंसान छोड़ कर दूर हुए

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॥ पावन पाठ ॥

आज के युग में मानवता इंसान छोड़ कर दूर हुए,

इसी किये मंदिर मस्जिद भगवान छोड़ कर दूर हुए,

कर्म भी पैसा धर्म भी पैसा और पैसा ईमान बना,

मोह माया में फस गया पैसा इतना अब पैसा भगवन बना,

माया के चकर में वेद कुरान छोड़ कर दूर हुये,

इसी किये मंदिर मस्जिद भगवान छोड़ कर दूर हुए,

झूठे जग में फस गया इतना हरी का नाम भुलाया है ,

झूठे जग में धुब गया ये और मोह में भरमाया है,

मतलब की खातिर ये धर्मी मान छोड़ कर दूर हुए,

इसी किये मंदिर मस्जिद भगवान छोड़ कर दूर हुए,

झूठे नाते बना लिए अब सेवा सतिकार नही,

मतलब की खातिर अपना है जग में सचा प्यार नि,

अभी इंसान इंसानों की पहचान छोड़ कर दूर हुए,

इसी किये मंदिर मस्जिद भगवान छोड़ कर दूर हुए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।