तू मन से भुला के देख दादी आये गी

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॥ पावन पाठ ॥

तू मन से भुला के देख दादी आये गी,

तू लग्न लगा के देख दादी आएगी,

तू मन से भुला के देख दादी आये गी,

मंदिर मंदिर भटक रहा मन ढूंढ रहा तू है किसको,

जिसके हिर्दय में भाव है सच्चा ढूंढ रही है माँ उसको,

जरा भाव जगा के देख दादी आएगी,

तू मन से भुला के देख दादी आये गी

आडम्बर को त्याग के माँ के चरणों को तू थाम ले,

जय दादी की जय दादी की कह कर माँ का नाम ले,

तू शरण में आके देख दादी आएगी,

तू मन से भुला के देख दादी आये गी

सौरव मधुकर भले बुरे कर्मो को पहचानती है ,

भाव है किसके मन में कैसे ये सब कुछ ही जानती है,

इसे अपना बना के देख दादी आएगी,

तू मन से भुला के देख दादी आये गी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।