हे शारदे माँ हे शारदे माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे शारदे माँ हे शारदे माँ अज्ञानता से हमे तार दे माँ,

तू स्वर की देवी है संगीत तुझसे,

हर शब्द तेरा है हर गीत तुझसे,

हम है अकेले हम है अधूरे,

तेरी शरण हम हमे प्यार दे माँ,

हे शारदे माँ हे शारदे माँ अज्ञानता से हमे तार दे माँ

मुनियो ने समजी गुनियो ने जानी वेदो की भाषा पुराणों की वाणी,

हम भी तो समजे हम भी तो जाने विद्या का हम को वरदान दे माँ,

हे शारदे माँ हे शारदे माँ अज्ञानता से हमे तार दे माँ

तू शवेत वर्णी कमल पे विराजे,

हाथो में वीणा मुकट सिर पे साजे,

मन से हमारे मिटा के अँधेरे हम को उजालो का संसार दे माँ,

हे शारदे माँ हे शारदे माँ अज्ञानता से हमे तार दे माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।