मैनु सोहनी गुफा दे अंदर तो

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॥ पावन पाठ ॥

मैनु सोहनी गुफा दे अंदर तो ,

सिद्ध जोगी वाजा मारदा,

पौणाहारी वाजा मारदा,

देवी देवते फूल बरसओंदे,

मेनू मंदिर दे सुपने आउंदे,

सुपने दे विच सोहना योगी आके मेनू पुकार दा,

मैनु सोहनी गुफा दे अंदर तो..........

जिस मंदिर विच रेहमत बरसे योगी दर्शन न मन तरसे,

सब नु अपने रंग विच रंगे भगता नु पेया पुकार दा,

मैनु सोहनी गुफा दे अंदर तो...

मंदिर उते झुल्दे झंडे,

झोली विचो खैरा वंडे,

ऊंचा जग विच रुतबा भगतो एह सच्ची सरकार दा,

मैनु सोहनी गुफा दे अंदर तो.........

जग जोगी दा चिमटा वज्दा सब दे मन विच जंदा वज्दा,

चिमटे दी करामात ना योगी सब दे कष्ट निवार दा,

मैनु आज गुफा दे अंदर तो ......

पमी योगी दिन भेटा गाउँदा,

राणा महिमा लिखदे जंदा,

इस योगी दे जावा सद के सब दे कम सवार दा,

मैनु सोहनी गुफा दे अंदर तो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।