सिद्ध योगी दे जाना भगतो जोगी दे दर जाना

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सिद्ध योगी दे जाना भगतो जोगी दे दर जाना,

जेहड़ा साढ़े अंग संग रेह्न्दा उसदा दर्शन पौना,

सिद्ध योगी दे जाना भगतो जोगी दे दर जाना,

श्रद्धा दे नाल मन चित लाके बाबे दे गुण गाइये,

ऊंची ऊंची सिद्ध जोगी दे रट जैकारे लाइये,

हर कदम ते चल के उसदा नाम ध्यानदे जाना,

सिद्ध योगी दे जाना भगतो जोगी दे दर जाना,

देशा नहीं परदेशा तो भी भगत भी दर ते आउंदे,

बैंड बाजे ढोलक चिमटा छेने खूब बजाउंदे,

भगता दे संग हाज़री भर के जीवन सफल बनओना,

सिद्ध योगी दे जाना भगतो जोगी दे दर जाना,

परमजीत गुप्पी चल के शाहतलैयां आवे,

बाली उनने वाला सोहनियाँ भेटा लिख्दा जावे,

झोली चिमटा लंगोट ते पहुये झंडा रॉट चढ़ना,

सिद्ध योगी दे जाना भगतो जोगी दे दर जाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।