उचियाँ चढ़ाइयाँ चढ़ के आये

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॥ पावन पाठ ॥

उचियाँ चढ़ाइयाँ चढ़ के आये,

इक वारि दर्शन दिखा जा योगियां,

साहनु तेरियां उडीका हुन आजा योगियां,

तेरी गुफा ते भर दे हाज़री,

मंगियां मुरादा झोली पाजा योगियां,

साहनु तेरियां उडीका हूँ आजा योगियां,

फर्याद किती तेरे आगे मेहनत न फल लगे,

तेरे लाड लगे आ ते होर न कोई दर लभे,

दिल विच चा लेके आइयां दर संगता,

आइयां संगता दे चा लाजा योगियां,

साहनु तेरियां उडीका हुन आजा योगियां,

दुखिया दे दुःख टूटे हाथ धरे जीहदे उते,

कमल ते कोजियां दे भाग जाग जान सुते,

रोट परशाद लेके आइया दर संगता,

ाइयाँ संगता दा तू भोग ला जा जोगियां

साहनु तेरियां उडीका हुन आजा योगियां,

सिद्ध योगी पौणाहारी संगत उडीके सारी,

चानन चुफेरे सारे करदे ओह इको वारी,

चीरा तो उमीदा लेके बैठे होये दर ते,

गल तेरे ते तिकी है तू मुका या जोगियां,

साहनु तेरियां उडीका हुन आजा योगियां,

खुशियां ते खेड़े दिते भागा भरे वेहड़े दिते,

हर ही मैदान फ़तेह रेहमता दे नाल जीते,

नैन साढ़े तेरे एह दीदार भाल दे,

नैना दी एह प्यास भुजा जा जोगियां,

साहनु तेरियां उडीका हुन आजा योगियां,

दीप करदा उडीका हुन आजा जोगियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।