मेरे दिल की है ये आखिरी इल्तज़ा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरे दिल की है ये आखिरी इल्तज़ा,

मैं तुझे डुंडलू लू तू यहाँ भी रहे,

मेरे सिर पे सदा तेरा हाथ हो,

मैं कहा भी राहु तू कहा भी रहे,

मेरे दिल की है ये आखिरी इल्तज़ा,

भुज भी जाये सभी मेरे ढर भर की आग,

फिर भी जलती रहे ये अगरवतियाँ,

धड़कनो में तेरी लोह चमकती रहे,

चाहे फिर हाथ में कुछ धुआँ भी रहे,

मेरे दिल की है ये आखिरी इल्तज़ा,

आदमी जो भी दे खत्म हो कर रहे,

साई ने जो दिया खत्म होता नहीं,

साई दौलत मगर सिर्फ उसको मिले,

जिसपे साई नजर मेहरबान भी रहे ,

मेरे दिल की है ये आखिरी इल्तज़ा,

लोग चाहे मेरा दिल जला ते रहे,

तेरा दीपक सदा मैं जलाती रहु,

है मेरि आरजू हर अँधेरे में तू,

पास रह कर मेरा पास बा भी नहीं,

मेरे दिल की है ये आखिरी इल्तज़ा,

हर तरफ बिजलियाँ अब कड़क ने लगी,

जैसे तूफ़ान सा कोई आने को है,

साई का नाम लो और दुआएं करो,

रास्ता भी रहे कारवा भी रहे,

मेरे दिल की है ये आखिरी इल्तज़ा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।