कभी मेरे घर भी आओ आके सुख दुःख के बतलाओ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कभी मेरे घर भी आओ आके सुख दुःख के बतलाओ,

कुछ सुन लो और सुनाओ बाबा श्याम धनि,

लागि दर्शन की अभिलाषा मेरे मन में बड़ी,

कभी मेरे घर भी आओ आके सुख दुःख के बतलाओ,

मात मोरवी के लाला हो दीं दयालु दाता,

मैंने सुना भक्तो के आंसू देख नहीं तू पाता,

तेरे होते मैं रोऊ ना जागे और न सोउ,

इस ज़िंदगी ने खो रहे चिंता घनी,

लागि दर्शन की अभिलाषा मेरे मन में बड़ी,

कभी मेरे घर भी आओ आके सुख दुःख के बतलाओ,

इस दुनिया को देख देख क्या तू भी रंग बदल गया,

खा खा छप्पन भोग तेरा भी रंग ढंग बदल गया,

मेरे घर रूखी सुखी पावे तू इसी लिए न आवे,

कदे भूखा ही रह जावे खावे सवा मणि,

लागि दर्शन की अभिलाषा मेरे मन में बड़ी,

कभी मेरे घर भी आओ आके सुख दुःख के बतलाओ,

इक बार तू आकर देखो भाव का भोग लगाऊ,

कमी नहीं माखन मिश्री की रज रज तुम्हे खिलाऊ,

करू ऐसी खातिर दारी ना भूले गा धीरधारी,

भावना देविंदर की यारी सँवारे रहे गी बने,

लागि दर्शन की अभिलाषा मेरे मन में बड़ी,

कभी मेरे घर भी आओ आके सुख दुःख के बतलाओ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।