रोटी खा ले जोगियां वे

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन बाबा बालक नाथ भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

रोटी खा ले जोगियां वे ,

लेके आई तेरी माँ,

रोसा केहरि गल दा तनु भूख लगी न,

बनखंडी विच गौआँ चार दा तू मेरियाँ,

रूस्या न कर जे कर हो जान देरीया,

कदो दा सी बोल्दा वनेरे साढ़े का,

रोटी खा ले जोगियां वे

रीजा नाल रोटी लसी मैं बनाई वे,

कोड वाली खोड़ विच चक के टिकाई वे,

भोजन टिकोण वाली दस केहरि था,

रोटी खा ले जोगियां वे......

थोड़ा थले लाके बालक बैठा ताड़ी वे,

रोटी लासी वल कदे तू नजर न मारी वे,

मुखो कुज बोले न तू हु ते न हां,

रोटी खा ले जोगियां वे

छेती छेती मोरा बचा घर वाला पाया कर,

दिन ढलने तो पेहला गौआँ तू लाया कर,

मैं बलिहारी चाँद वारि तेथो जा,

रोटी खा ले जोगियां वे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।