जो बैठे चरणों में तिहारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जो बैठे चरणों में तिहारे उसे वाणी का वरदान मिले,

माँ तू जिसकी और निहारे उस गुनियो में अस्थान मिले,

जो बैठे चरणों में तिहारे उसे वाणी का वरदान मिले,

वर दे वीणा वादनी वर दे,

स्वर शब्दों से अन्तस वर दे,

तेरी वीणा जब यंकारे साधक को नव प्राण मिले,

जो बैठे चरणों में तिहारे उसे वाणी का वरदान मिले,

शब्द कहाये ब्रह्म सा हो दर,

कुछ भी नहीं संगीत से बढ़ कर,

स्वर सादक जब स्वर से पुकारे उसे सहज स्वयं भगवान मिले,

जो बैठे चरणों में तिहारे उसे वाणी का वरदान मिले,

कंठ समर्पित गान समर्पित हिर्दय समर्पित प्राण समर्पित,

अर्पित श्रदा भाव हमारे हम सांचे स्वर का ज्ञान मिले,

जो बैठे चरणों में तिहारे उसे वाणी का वरदान मिले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।