रूखी मिले चाहे रोटी मुझे

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॥ पावन पाठ ॥

रूखी मिले चाहे रोटी मुझे कोई गम नहीं,

रखना सुखी परिवार मेरा विनती है बस यही,

सिर पर हो न कर्जा कभी न हाथ फेहलाऊ कभी,

दर दर की ठोकर खाऊ न मुझे राह दिखादो सही,

घुट घुट के जीना बाबा मेरे बस में अब नहीं,

रखना सुखी परिवार मेरा विनती है बस यही,

नफरत को दिल से निकाल के तू प्यार सीखा देना,

रखा नहीं कुछ गरूर में,तू झुकना सीखा देना,

तेरे होते हुए न ढोलू गा ये पूरा तुझपे यकीन ,

रखना सुखी परिवार मेरा विनती है बस यही,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।