काम, क्रोध, मद, लोभ और माया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

काम, क्रोध, मद, लोभ और माया,

पहरे धार बिठाया इन सबसे जो बच कर आया उसने श्याम को पाया,

बोलो है ना बोलो है ना,

काम, क्रोध, मद, लोभ और माया.....

इन पांचो के पीछे देखो भाग रहा जग सारा,

छोड़ दे चिंता इन पांचो की बन जा श्याम का प्यारा,

जिस ने इन पांचो को छोड़ा उसका साथ निभाया,

बोलो है ना बोलो है ना,

काम, क्रोध, मद, लोभ और माया.....

माया नगरी ये दुनिया है,

थोड़ा दूर भगाओ,

नरसी मीरा कर्मा जैसे मन में भाव जगो,

जिनके मन में भाव है ऐसे उनके घर में आया,

बोलो है ना बोलो है ना,

काम, क्रोध, मद, लोभ और माया.....

मांग ना हो तो श्याम प्रभु से ऐसी शक्ति मानगो,

हारे हुए के साथी बने हम ऐसी भगति मानगो,

श्याम कहे जिस जिस ने किया उस में श्याम समाया,

बोलो है ना बोलो है ना,

काम, क्रोध, मद, लोभ और माया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।