अगर मेरे जोगी का सहारा न होता

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॥ पावन पाठ ॥

अगर मेरे जोगी का सहारा न होता,

दुनिया में कोई भी हमारा न होता,

दूर न होती मन की चिंता न कोई खुशाली होती,

जीवन की भगियां में मेरे ना कोई हरयाली होती,

कश्ती का कोई भी किनारा न होता,

दुनिया में कोई भी हमारा न होता,

अगर मेरे जोगी का सहारा न होता,

दया अगर ना होती उसकी,

सुख चैन कोई अरमान न होता,

ना मिलती शोहरत इस जग में,

मान कोई समान न होता,

कही पर भी मेरा गुजरा न होता,

दुनिया में कोई भी हमारा न होता,

अगर मेरे जोगी का सहारा न होता,

सफल कभी हम कही न होते अगर उसे हम जान ना पाते,

जितने स्वास लिए है अब तक सुर सागर किसे काम न आते,

स्वासो से जोगी को पुकारा ना होता,

दुनिया में कोई भी हमारा न होता,

अगर मेरे जोगी का सहारा न होता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।