किथे वसदा है मुंदरा वालेया

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॥ पावन पाठ ॥

किथे वसदा है मुंदरा वालेया एहनी सोहनी गुफा छड़ के,

सारे छपा छपा जंगला च टोलिया ,

एहनी सोहनी गुफा छड़ के,

भगता दे सपने क्यों चूर करि जाना है,

खैर पावे ना पावे दूर क्यों जाना है,

बड़ी लोड तेरी जग रखवालेया,

एहनी सोहनी गुफा छड़ के,

किथे वसदा है मुंदरा वालेया.......

अरजा ही करि जाइये गेड़ा इक ला जा,

किना क प्यार करे तू भी ता दिखा जा,

किते होर दा नि डेरा जाके ला लिया,

एहनी सोहनी गुफा छड़ के,

किथे वसदा है मुंदरा वालेया.......

ख़ास ता कोई चीज असि तेरे कोलो मंगी न,

करदे मुराद पूरी लऱया च तंगी न,

केवल माफ़ करि चंगा मंदा बोलिया,

एहनी सोहनी गुफा छड़ के,

किथे वसदा है मुंदरा वालेया.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।