सुमिर ले साई साई बंदे सच्चे मन से ध्यान लगा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

अपना इरादा नेक है सब का मालिक एक है

सुमिर ले साई साई बंदे सच्चे मन से ध्यान लगा,

बिगड़ी तेरी बात बने गी,

शिरडी तू इक बार तो आ,

सुमिर ले साई साई बंदे सच्चे मन से ध्यान लगा,

संकट तुझपे आये जब भी साई नाम ध्याले,

साई नाम ध्या के इस जीवन से मुक्ति पा ले,

साई है तेरा पालनहारा साई मनवा गा ले,

सुमिर ले साई साई बंदे सच्चे मन से ध्यान लगा,

आते जाते सोते उठ ते साई नाम जपा कर,

रखले इस पूंजी को तू लोगो से बचा बचा कर,

जीवन में सुख पाना है तो,

साई को तू मना ले रे,

सुमिर ले साई साई बंदे सच्चे मन से ध्यान लगा,

राह बड़ी मुश्किल है साई को पायेगा कैसे,

जन्म जन्म मरण के इस बंधन से छूटे गा तू कैसे,

साई है तेरे भाग्ये विधयता साई का ध्यान लगा ले,

सुमिर ले साई साई बंदे सच्चे मन से ध्यान लगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।