तेरी किरपा दे नाल जोगियां

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी किरपा दे नाल जोगियां मेरा चलदा है परिवार,

रोम रोम मेरा दातिया तेरा करदा शूकर गुजार,

तेरी किरपा दे नाल जोगियां मेरा चलदा है परिवार,

धुर अमृत दिन बूंदा नाल ऐसी नित रखिये मन धो के,

रज रज दर्शन करिये तेरे चरण कमल नित शो के,

बिना तेल बिन बतियो दीवा जगदा रहे इक सार,

तेरी किरपा दे नाल जोगियां मेरा चलदा है परिवार,

आतम रुपी सोइ प्रोया नाम तेरे दा धागा,

लग चरना नाल सफल हो गया एह जीवन भगभागा,

नाम सहारे मन न जीत के जित लिया एह संसार,

तेरी किरपा दे नाल जोगियां मेरा चलदा है परिवार,

किती किरपा अमन दीप ते उस न लिख ला ता,

सादे वर्गे बेसुरया नु सूरा दे विच गवा ता,

सच स्यानिया कहियाँ तुंबा नहीं बज्दा बिन तार,

तेरी किरपा दे नाल जोगियां मेरा चलदा है परिवार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।