कांशी विच आया अवतार कोई संगते

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

कांशी विच आया अवतार कोई संगते,

फूल बरसौंदे सारे खुशिया मनाउंदे,

सारे करदे ने जय जय कार,

कांशी विच आया अवतार कोई संगते,

इंद्र पूरी तो परियां ाइयाँ,

माँ कलसा नू मिलान वधाईयां,

पिता संतोख दे घर विच आये,

कॉम दे सिरजन हार,

कांशी विच आया अवतार कोई संगते,

कोई आखे एहनु रूप अलाही,

कूप हनेरेया दी रुशनाइ,

बाद उम्र विच खबरे आ गई सचखंड दी सरकार,

कांशी विच आया अवतार कोई संगते,

गौ गरीब दी करण गे राखी,

रेहन नि देनी वेइन्साफ़ी,

चन गोराया वाले ते हो गई रेहमत अप्रम पार,

कांशी विच आया अवतार कोई संगते,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।