मैं वारि जाऊ पितर दादा थारे पे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मेरी नैया लगी है किनारे पे,

मैं वारि जाऊ पितर दादा थारे पे,

पितर दादा मेहर खिला दे,

उजड़ा मेरा संसार वसा दे,

कुछ दया करो महारे पे,

मैं वारि जाऊ पितर दादा थारे पे,

मारे लात ये भैंस दुधारी,

विनती सुन लो दादा हमारी,

या ज़िंदगी तेरे इशारे पे,

मैं वारि जाऊ पितर दादा थारे पे,

पांचो कपड़े रखे तुम्हारे,

बिगड़े काम बनाओ हमारे,

थारी फिरके ध्वजा चुबारे पे,

मैं वारि जाऊ पितर दादा थारे पे,

दूध पूत रोजगार बढ़ाना,

दास राजेंदर पे मेहर बरसाना,

करा दया तू भोली वेचारे पे,

मैं वारि जाऊ पितर दादा थारे पे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।