वर दे वर दे वर दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

वर दे वर दे वर दे,

तन मन में माँ भक्ति भर दे,

वर दे हे माँ वीणा प्राणी,

ज्ञान द्वीप मलिका,

कण कण में ज्योति भर दे,

वर दे वर दे वर दे,

हे शूद्र ज्ञान गंगे तू किरपा बून्द करदे,

महा देव तू कला की अज्ञान तप हर ले हर हर ले,

वर दे वर दे वर दे,

हे ज्ञान सीधी दाती मेरा पथ प्रसथ करदे,

जाग्रति ध्वज को ढोहने की शक्ति मुझ में भर दे,

वर दे वर दे वर दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।