अम्बीके भवानी मुझे क्यों विसारा देदो सहारा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अम्बीके भवानी मुझे क्यों विसारा देदो सहारा,

चरणों से दुरी नहीं अब गवारा दिल ने पुकारा,

जीवन की कश्ती है तेरे हवाले तू ही संभाले,

उस पार हो गी मिलेगा किनारा,दिल ने पुकारा

अम्बीके भवानी मुझे क्यों विसारा देदो सहारा,

अगर तुम जो चाहो ये तस्वीर बदले ये तकदीर बदले,.

कितनो का तुम ने मुकदर सवारा दिल ने पुकारा,

अम्बीके भवानी मुझे क्यों विसारा देदो सहारा,

तुम से छुपा क्या है सब जानती हो पहचानती हो,

भला या बुरा हु हु मैं तुम्हारा दिल ने पुकारा,

अम्बीके भवानी मुझे क्यों विसारा देदो सहारा,

केवल तुम्हारी शरण मांग ता हु चरण मांगता हु,

मंजिल है मेरी तुम्हारा ही द्वारा,

अम्बीके भवानी मुझे क्यों विसारा देदो सहारा,

निरशा में आशा तुम्ही से है मेरी करो अब न देरी,

कब तक यु तड़पे दीपक वेचारा दिल ने पुकारा,

अम्बीके भवानी मुझे क्यों विसारा देदो सहारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।