होली खेलो बांके बिहारी रंगीलो फागुन आयो है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

होली खेलो बांके बिहारी, रंगीलो फागुन आयो है

फागुन आयो है, रंगीलो फागुन आयो है

चाले हवा बसंती प्यारी,

मुरली की है तान मन हारी

नाचे मगन हो बांके बिहारी,

उड़ रह्यो लाल गुलाल, सखन मिल रंग लगायो है

होली खेलो बांके बिहारी, रंगीलो फागुन आयो है

रंगन की बौछार होवत है

बृज वासी सब वाट जोवत हैं

नयो नयो श्रृंगार होवत हैं

बजे चांग मृदंग, सुरीलो साज सजायो है

होली खेलो बांके बिहारी, रंगीलो फागुन आयो है

बरसाने से राधा आई,

ले पिचकारी धूम मचाई

श्याम संग ले रास रचाई

माचो हुड़दंग आज, बृज में आनद छायो है

होली खेलो बांके बिहारी, रंगीलो फागुन आयो है

बाबा नन्द यशोदा मैया,

बल दाऊ श्रीदामा भैया,

खेले परस्पर लेवे बलईया

यमुना जी के तीर, महारास सागर छायो है

होली खेलो बांके बिहारी, रंगीलो फागुन आयो है

उड़त पुष्प चन्दन बहुरंगा

गुटत भंग चढ़े रंग सुरंगा

बोलत कोयल शुक और ब्रंगा

माथे मोर मुकुट, बांकी शवि रास बरसाओ है

होली खेलो बांके बिहारी, रंगीलो फागुन आयो है

होली खेलो रसिक बिहारी, रंगीलो फागुन आयो है

होली खेलो श्याम बिहारी, रंगीलो फागुन आयो है

होली खेलो रमन बिहारी, रंगीलो फागुन आयो है

होली खेलो कुञ्ज बिहारी, रंगीलो फागुन आयो है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।