साई नाम लीजिये सदा मौज कीजिये

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॥ पावन पाठ ॥

अमृत को छोड़ के ज़हर काहे पीजिये,

साई नाम लीजिये सदा मौज कीजिये,

मीठा साई नाम है मीठी साई की अदा,

मीठा साई रूप सा ऐसा कौन है बता,

और इस मिठास पर कौन ना ही रिजिऐ,

साई नाम लीजिये सदा मौज कीजिये,

केसा अद्भुत करिश्मा दिखया साई ने,

पानी से दीपक ऐसा जलाया साई ने,

भेद भाव भूल के सब साई साई कीजिये,

साई नाम लीजिये सदा मौज कीजिये,

हाथ में किसी के फूल और नारियल चढ़े,

मैं भी लाइ चोला साई द्वार तेरे है खड़े,

हमारी मनो कामना साई पुराण कीजिये,

साई नाम लीजिये सदा मौज कीजिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।