साई के नाम से भव सागर पार हो जाये

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॥ पावन पाठ ॥

साई के नाम से भव सागर पार हो जाये,

तेरे सब पापो से तुझको निजात मिल जाये,

तेरी हर बात की साई को खबर रहती है,

तेरे हर कर्म पे साई की नजर रहती है,

देखो बे कार के धंधे में बंदा खोया है,

काट ता है वही जो उसने पहले वोया है,

राह जो सोचता सो बात बाद में पछतायेगा,

आया है खाली हाथ खाली हाथ जाएगा,

साई के नाम से भव सागर पार हो जाये,

जरे जरे में है हर शह में नूर तेरा है,

तेरी रेहमत के बिना दुनिया में अँधेरा है,

अल्लहा वाहेगुरु इशा का तू उजला है,

राम का नाम कही कृष्ण बंसी वाला है,

जो भी आये तेरे दर से वो न खाली जाये,

मिले मुराद उसकी झोली खली बार जाये,

साई के नाम से भव सागर पार हो जाये,

हज़ार बार ये रह रह के सोचता हु मैं.

मैं क्या था और मुझे क्या बना दिया तूने,

कर्म किया मुझे अपना बना लिया तूने,

खुदा के नाम का जलवा दिखा दिया तूने,

जो दुःख में साथ दे वो तो हमारा साई है,

तुम्हारे नाम की खुश्बू जहा में छाई है ,

साई के नाम से भव सागर पार हो जाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।