आजा वे आजा वे सोहने जोगियां

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॥ पावन पाठ ॥

करा वेंतिया सुन ले तू आजा,

आजा वे आजा वे सोहने जोगियां,

मेरी अँखियाँ दी प्यास न मुका जा,

आजा वे आजा वे सोहने जोगियां,

तेरे वाजो मैनु चंगा लगदा न कुज वे,

जानी जान तू है लेना दिला दिन भुज वे,

मेरे कालजे नू आके ठण्ड पाजा,

आजा वे आजा वे सोहने जोगियां,

सोहना रूप सोहनी रंगिया जटावा ने,

मोर दी सवारी पैरी सूंदर खड़ावा ने,

लगी प्यास दीद वाली तू मुका जा,

आजा वे आजा वे सोहने जोगियां...

गोआ वाला कहंदा कोई कहंदा योगी नाथ वे,

तेरा मेरा बनया वे पेहला वांगु साथ वे,

सरजीवन उडीका न मुका जा,

आजा वे आजा वे सोहने जोगियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।