दादी तेरे मंदिर में आ जीवन कारा वास हो

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ऐसा गुनाह करादे मुकदमा आये तेरे पास हो,

दादी तेरे मंदिर में आ जीवन कारा वास हो,

ऐसा गुनाह करादे मुकदमा आये तेरे पास

छोड़ तेरे मंदिर की सीमा बाहर निकल सकू न,

कमरा ऐसा फिक्स करा दे कमरा बदल स्कू न,

इतना कमरा माँ बिलकुल मंदिर के पास हो,

दादी तेरे मंदिर में आ जीवन कारा वास हो,

मेरे गुन्हा में मेरी माँ परिवार मेरा शामिल हो,

दया नहीं करना उनको भी यही सजा हासिल हो,

भाग न आ जाए सब के ऊपर निगरानी ख़ास हो,

दादी तेरे मंदिर में आ जीवन कारा वास हो,

रोज पड़े तेरे मंदिर में तेरे सामने पेशी,

मुझको देख दया आ जाये हालत हो जाये ऐसी,

इक दिन कैदी से बन जाऊ मैं मैया का दास हो,

दादी तेरे मंदिर में आ जीवन कारा वास हो,

काम काज और चाल चलन से जिस दिन मिले रिहाई,

वनवारी दरबार से जब तू देने लगे विदाई,

मंदिर से निकले ने से पहले निकले तेरी सांस हो,

दादी तेरे मंदिर में आ जीवन कारा वास हो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।