दर्शन मेरे सतगुरु दे करके खिड़ गया जग सारा

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॥ पावन पाठ ॥

फूल कलियाँ नाल सज सवार,

संगता जांदियाँ ने बलिहारी,

अन हद नूर धरती उते पेंदा है लिश्कारा,

दर्शन मेरे सतगुरु दे करके खिड़ गया जग सारा,

टपड़ा मन सी ठर गया तप के,

दुःख भी लंग गए पासा वट के,

अखियां विचो उछल उछल के वगि प्रेम दी धारा,

दर्शन मेरे सतगुरु दे करके खिड़ गया जग सारा,

किंज तका तेरे जल कारे धन धन सचिये सरकार,

इक घडी ना साडा हॉवे तेरे बिना गुजारा,

दर्शन मेरे सतगुरु दे करके खिड़ गया जग सारा,

पौना सरगम लौंडियाँ पइयाँ,

गीत ख़ुशी दे गोंदिया पइयाँ,

अखियां ने निन्दियाँ वल दिठा कैसा अजब नजारा,

दर्शन मेरे सतगुरु दे करके खिड़ गया जग सारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।